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  • Akshat


    Akshatā has the ability to attract the frequencies of the five Deities in the Universe (Ganapati, Shri Durgadevi, Shiva, Shri Ram and Shri Krushna), to activate them, make them functional and to transmit them with the help of the Absolute Earth and Absolute Water elements. Hence, akshatā is sprinkled on every component of the ritualistic worship, so also on the Idol of Deity after the panchopachār or Shodashopachār pūjā and after activating the divinity in all of them, they are invoked to become functional. In the absence of any substance in a panchopchar pūjā, akshatā is used as a substitute. Akshatā is a medium that encompasses all the Deity Principles and hence is an important all-encompassing medium in ritualistic worship. Because of the energy in the Deity, when akshatā is offered to them, benevolent energy and vibrations develops in the akshatā. If a string of a sitar, among a pair of similar frequency sitars, is sounded then the same sound is emitted from the other sitars too.

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  • Betel Nuts

    65.00325.00 (Incl. of Taxes)

    here is a perfect blend of particles of the Absolute Earth and Absolute Water elements in the betel nut. The Earth element particles from the betel nut bind the frequencies of Chaitanya emanating from the Deity. Then the particles of Chaitanya in these frequencies of Chaitanya are activated by the particles of the Absolute Water element in it. Thus the betel nut serves as the chief medium for the exchange of frequencies between a Deity and the embodied soul.

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    299.00 399.00

    Bhai Dooj (भाई दूज) / Bhau-Beej / Bhai Tika / Bhai Phonta (ভাইফোঁটা) is a festival celebrated by Hindus of the Indian subcontinent, notably India and Nepal, on the second lunar day of Shukla Paksha (bright fortnight) in the Vikram Samvat Hindu calendar or of Shalivahan Shaka calendar month of Kartika. It is celebrated during the Diwali or Tihar festival. The celebrations of this day are similar to the festival of Raksha Bandhan. On this day, brothers give gifts to their sisters. In the southern part of the country, the day is celebrated as Yama Dwitiya.

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    Chandra 11000 Vedic Mantra Jaap

    12,999.00 15,999.00

    शनिवार का चंद्र दर्शन करके पूजा करने से पहले दिन भर व्रत करें और शाम का स्‍नान करके शुद्ध हो कर चंद्रमा की पूजा करें। उसके बाद चंद्रमा को जल, रोली और अक्षत चढ़ा कर पूजा करें। इसके पश्‍चात सुपात्र को कपड़े, चावल और चीनी का दान करें। आप धन, फल और मिठाई आदि का भी दान कर सकते हैं। इसके बाद शुद्ध एवम् सात्‍विक भोजन ग्रहण करके अपना व्रत पूरा करें।

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    1. All Pooja request need to be submitted minimum 7 days prior of actual planned date
    2. Once after successful order our team will share the Pundit’s name & other details within 3/4 days via registered email & SMS
    3. All Pooja essentials to be arranged by the organiser
    4. Food & accommodations for the pundits to be arranged by the organiser in case of the Pooja is continue more than 1 day
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  • Cloves (लौंग)

    180.00860.00 (Incl. of Taxes)

    Cloves are the aromatic flower buds of a tree in the family Myrtaceae, Syzygium aromaticum. They are native to the Maluku Islands in Indonesia, and are commonly used as a spice

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  • Cotton Wicks


    Cotton wicks for diyas are mostly made by women using their hands manually.

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    1,299.00 1,899.00

    Diwali, Deepavali or Dipavali is the Hindu festival of lights, which is celebrated every autumn in the northern hemisphere. One of the most popular festivals of Hinduism, Diwali symbolises the spiritual “victory of light over darkness, good over evil and knowledge over ignorance.” Light is a metaphor for knowledge and consciousness. During the celebration, temples, homes, shops and office buildings are brightly illuminated. The preparations, and rituals, for the festival typically last five days, with the climax occurring on the third day coinciding with the darkest night of the Hindu lunisolar month Kartika.

    During the climax, illuminate the interior and exterior of their homes with diyas (oil lamps or candles), offer puja (worship) to Lakshmi, the goddess of prosperity and wealth, light fireworks, and partake in family feasts, where mithai (sweets) and gifts are shared. Diwali is also a major cultural event for the Hindu and Jain diaspora from the Indian subcontinent.

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  • Dry Turmeric


    Turmeric being a tuber, the frequencies of earth in it are in far greater quantity than in stems growing above the surface of earth. Vermilion is prepared from turmeric. Since turmeric and vermilion are offered to Deities, the worshipper benefits from the frequencies of earth in them, as well as from the frequencies of Deities.

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    1,199.00 1,999.00

    The festival is observed in the Hindu calendar month of Ashvin and is a multi-day festival that features elaborate temple and stage decorations (pandals), scripture recitation, performance arts, revelry, and processions. It is a major festival in the Shaktism tradition of Hinduism across India and Shakta Hindu diaspora. Durga Puja festival marks the battle of goddess Durga with the shape-shifting, deceptive and powerful buffalo demon Mahishasura, and her emerging victorious. Thus, the festival epitomises the victory of good over evil, but it also is in part a harvest festival that marks the goddess as the motherly power behind all of life and creation.

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    Durga Saptshati Pooja

    8,999.00 11,999.00

    श्री दुर्गा सप्तशती
    भुवनेश्वरी संहिता में कहा गया है- जिस प्रकार से ”वेद” अनादि है, उसी प्रकार ”सप्तशती” भी अनादि है। श्री व्यास जी द्वारा रचित महापुराणों में ”मार्कण्डेय पुराण” के माध्यम से मानव मात्र के कल्याण के लिए इसकी रचना की गई है। जिस प्रकार योग का सर्वोत्तम ग्रंथ गीता है उसी प्रकार ”दुर्गा सप्तशती” शक्ति उपासना का श्रेष्ठ ग्रंथ है |

    ‘दुर्गा सप्तशती’के सात सौ श्लोकों को तीन भागों प्रथम चरित्र (महाकाली), मध्यम चरित्र (महालक्ष्मी) तथा उत्तम चरित्र (महा सरस्वती) में विभाजित किया गया है।

    ‘दुर्गा सप्तशती’ के सात सौ श्लोकों का प्रयोग विवरण इस प्रकार से है।
    प्रयोगाणां तु नवति मारणे मोहनेऽत्र तु।
    उच्चाटे सतम्भने वापि प्रयोगाणां शतद्वयम्॥
    मध्यमेऽश चरित्रे स्यातृतीयेऽथ चरित्र के।
    विद्धेषवश्ययोश्चात्र प्रयोगरिकृते मताः॥
    एवं सप्तशत चात्र प्रयोगाः संप्त- कीर्तिताः॥
    तत्मात्सप्तशतीत्मेव प्रोकं व्यासेन धीमता॥
    अर्थात इस सप्तशती में मारण के नब्बे, मोहन के नब्बे, उच्चाटन के दो सौ, स्तंभन के दो सौ तथा वशीकरण और विद्वेषण के साठ प्रयोग दिए गये हैं। इस प्रकार यह कुल 700 श्लोक 700 प्रयोगों के समान माने गये हैं।

    दुर्गा सप्तशती पाठ विधि दुर्गा सप्तशती को सिद्ध कैसे करें-
    नवार्ण मंत्र जप और सप्तशती न्यास के बाद तेरह अध्यायों का क्रमशः पाठ, प्राचीन काल में कीलक, कवच और अर्गला का पाठ भी सप्तशती के मूल मंत्रों के साथ ही किया जाता रहा है। आज इसमें अथर्वशीर्ष, कुंजिका मंत्र, वेदोक्त रात्रि देवी सूक्त आदि का पाठ भी समाहित है जिससे साधक एक घंटे में देवी पाठ करते हैं।

    दुर्गा सप्तशती वाकार विधि :
    यह विधि अत्यंत सरल मानी गयी है। इस विधि में प्रथम दिन एक पाठ प्रथम अध्याय, दूसरे दिन दो पाठ द्वितीय, तृतीय अध्याय, तीसरे दिन एक पाठ चतुर्थ अध्याय, चौथे दिन चार पाठ पंचम, षष्ठ, सप्तम व अष्टम अध्याय, पांचवें दिन दो अध्यायों का पाठ नवम, दशम अध्याय, छठे दिन ग्यारहवां अध्याय, सातवें दिन दो पाठ द्वादश एवं त्रयोदश अध्याय करके एक आवृति सप्तशती की होती है।

    दुर्गा सप्तशती संपुट पाठ विधि :
    किसी विशेष प्रयोजन हेतु विशेष मंत्र से एक बार ऊपर तथा एक नीचे बांधना उदाहरण हेतु संपुट मंत्र मूलमंत्र-1, संपुट मंत्र फिर मूलमंत्र अंत में पुनः संपुट मंत्र आदि इस विधि में समय अधिक लगता है।

    दुर्गा सप्तशती सार्ध नवचण्डी विधि :
    इस विधि में नौ ब्राह्मण साधारण विधि द्वारा पाठ करते हैं। एक ब्राह्मण सप्तशती का आधा पाठ करता है। (जिसका अर्थ है- एक से चार अध्याय का संपूर्ण पाठ, पांचवे अध्याय में ”देवा उचुः- नमो देव्ये महादेव्यै” से आरंभ कर ऋषिरुवाच तक, एकादश अध्याय का नारायण स्तुति, बारहवां तथा तेरहवां अध्याय संपूर्ण) इस आधे पाठ को करने से ही संपूर्ण कार्य की पूर्णता मानी जाती है। एक अन्य ब्राह्मण द्वारा षडंग रुद्राष्टाध्यायी का पाठ किया जाता है। इस प्रकार कुल ग्यारह ब्राह्मणों द्वारा नवचण्डी विधि द्वारा सप्तशती का पाठ होता है। पाठ पश्चात् उत्तरांग करके अग्नि स्थापना कर पूर्णाहुति देते हुए हवन किया जाता है जिसमें नवग्रह समिधाओं से ग्रहयोग, सप्तशती के पूर्ण मंत्र, श्री सूक्त वाहन तथा शिवमंत्र ‘सद्सूक्त का प्रयोग होता है जिसके बाद ब्राह्मण भोजन,’ कुमारी का भोजन आदि किया जाता है। वाराही तंत्र में कहा गया है कि जो ”सार्धनवचण्डी” प्रयोग को संपन्न करता है वह प्राणमुक्त होने तक भयमुक्त रहता है, राज्य, श्री व संपत्ति प्राप्त करता है।

    दुर्गा सप्तशती शतचण्डी विधि :
    मां की प्रसन्नता हेतु किसी भी दुर्गा मंदिर के समीप सुंदर मण्डप व हवन कुंड स्थापित करके (पश्चिम या मध्य भाग में) दस उत्तम ब्राह्मणों (योग्य) को बुलाकर उन सभी के द्वारा पृथक-पृथक मार्कण्डेय पुराणोक्त श्री दुर्गा सप्तशती का दस बार पाठ करवाएं। इसके अलावा प्रत्येक ब्राह्मण से एक-एक हजार नवार्ण मंत्र भी करवाने चाहिए। शक्ति संप्रदाय वाले शतचण्डी (108) पाठ विधि हेतु अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी तथा पूर्णिमा का दिन शुभ मानते हैं। इस अनुष्ठान विधि में नौ कुमारियों का पूजन करना चाहिए जो दो से दस वर्ष तक की होनी चाहिए तथा इन कन्याओं को क्रमशः कुमारी, त्रिमूर्ति, कल्याणी, रोहिणी, कालिका, शाम्भवी, दुर्गा, चंडिका तथा मुद्रा नाम मंत्रों से पूजना चाहिए। इस कन्या पूजन में संपूर्ण मनोरथ सिद्धि हेतु ब्राह्मण कन्या, यश हेतु क्षत्रिय कन्या, धन के लिए वेश्य तथा पुत्र प्राप्ति हेतु शूद्र कन्या का पूजन करें।

    इन सभी कन्याओं का आवाहन प्रत्येक देवी का नाम लेकर यथा ”मैं मंत्राक्षरमयी लक्ष्मीरुपिणी, मातृरुपधारिणी तथा साक्षात् नव दुर्गा स्वरूपिणी कन्याओं का आवाहन करता हूं तथा प्रत्येक देवी को नमस्कार करता हूं।” इस प्रकार से प्रार्थना करनी चाहिए। वेदी पर सर्वतोभद्र मण्डल बनाकर कलश स्थापना कर पूजन करें। शतचण्डी विधि अनुष्ठान में यंत्रस्थ कलश, श्री गणेश, नवग्रह, मातृका, वास्तु, सप्तऋषी, सप्तचिरंजीव, 64 योगिनी 50 क्षेत्रपाल तथा अन्याय देवताओं का वैदिक पूजन होता है। जिसके पश्चात् चार दिनों तक पूजा सहित पाठ करना चाहिए। पांचवें दिन हवन होता है।

    इन सब विधियों (अनुष्ठानों) के अतिरिक्त प्रतिलोम विधि, कृष्ण विधि, चतुर्दशीविधि, अष्टमी विधि, सहस्त्रचण्डी विधि (1008) पाठ, ददाति विधि, प्रतिगृहणाति विधि आदि अत्यंत गोपनीय विधियां भी हैं जिनसे साधक इच्छित वस्तुओं की प्राप्ति कर सकता है।

    दुर्गा सप्तशती/ श्री दुर्गासप्तशती महायज्ञ / अनुष्ठान विधि
    भगवती मां दुर्गाजी की प्रसन्नता के लिए जो अनुष्ठान किये जाते हैं उनमें दुर्गा सप्तशती का अनुष्ठान विशेष कल्याणकारी माना गया है। इस अनुष्ठान को ही शक्ति साधना भी कहा जाता है। शक्ति मानव के दैनन्दिन व्यावहारिक जीवन की आपदाओं का निवारण कर ज्ञान, बल, क्रिया शक्ति आदि प्रदान कर उसकी धर्म-अर्थ काममूलक इच्छाओं को पूर्ण करती है एवं अंत में आलौकिक परमानंद का अधिकारी बनाकर उसे मोक्ष प्रदान करती है। दुर्गा सप्तशती एक तांत्रिक पुस्तक होने का गौरव भी प्राप्त करती है। भगवती शक्ति एक होकर भी लोक कल्याण के लिए अनेक रूपों को धारण करती है। श्वेतांबर उपनिषद के अनुसार यही आद्या शक्ति त्रिशक्ति अर्थात महाकाली, महालक्ष्मी एवं महासरस्वती के रूप में प्रकट होती है। इस प्रकार पराशक्ति त्रिशक्ति, नवदुर्गा, दश महाविद्या और ऐसे ही अनंत नामों से परम पूज्य है। श्री दुर्गा सप्तशती नारायणावतार श्री व्यासजी द्वारा रचित महा पुराणों में मार्कण्डेयपुराण से ली गयी है। इसम सात सौ पद्यों का समावेश होने के कारण इसे सप्तशती का नाम दिया गया है। तंत्र शास्त्रों में इसका सर्वाधिक महत्व प्रतिपादित है और तांत्रिक प्रक्रियाओं का इसके पाठ में बहुधा उपयोग होता आया है। पूरे दुर्गा सप्तशती में 360 शक्तियों का वर्णन है। इस पुस्तक में तेरह अध्याय हैं। शास्त्रों के अनुसार शक्ति पूजन के साथ भैरव पूजन भी अनिवार्य माना गया है। अतः अष्टोत्तरशतनाम रूप बटुक भैरव की नामावली का पाठ भी दुर्गासप्तशती के अंगों में जोड़ दिया जाता है। इसका प्रयोग तीन प्रकार से होता है।

    [ 1.] नवार्ण मंत्र के जप से पहले भैरवो भूतनाथश्च से प्रभविष्णुरितीवरितक या नमोऽत्त नामबली या भैरवजी के मूल मंत्र का 108 बार जप।
    [ 2.] प्रत्येक चरित्र के आद्यान्त में 1ुन्डेफिनेड1 पाठ।
    [ 3.] प्रत्येक उवाचमंत्र के आस-पास संपुट देकर पाठ। नैवेद्य का प्रयोग अपनी कामनापूर्ति हेतु दैनिक पूजा में नित्य किया जा सकता है। यदि मां दुर्गाजी की प्रतिमा कांसे की हो तो विशेष फलदायिनी होती है।

    दुर्गा सप्तशती का अनुष्ठान कैसे करें।
    1. कलश स्थापना
    2. गौरी गणेश पूजन
    3. नवग्रह पूजन
    4. षोडश मातृकाओं का पूजन
    5. कुल देवी का पूजन
    6. मां दुर्गा जी का पूजन निम्न प्रकार से करें।
    आवाहन : आवाहनार्थे पुष्पांजली सर्मपयामि।
    आसन : आसनार्थे पुष्पाणि समर्पयामि।
    पाद : पाद्यर्यो : पाद्य समर्पयामि।
    अर्घ्य : हस्तयो : अर्घ्य स्नानः ।
    आचमन : आचमन समर्पयामि।
    स्नान : स्नानादि जलं समर्पयामि।
    स्नानांग : आचमन : स्नानन्ते पुनराचमनीयं जलं समर्पयामि।
    दुधि स्नान : दुग्ध स्नान समर्पयामि।
    दहि स्नान : दधि स्नानं समर्पयामि।
    घृत स्नान : घृतस्नानं समर्पयामि।
    शहद स्नान : मधु स्नानं सर्मपयामि।
    शर्करा स्नान : शर्करा स्नानं समर्पयामि।
    पंचामृत स्नान : पंचामृत स्नानं समर्पयामि।
    गन्धोदक स्नान : गन्धोदक स्नानं समर्पयामि
    शुद्धोदक स्नान : शुद्धोदक स्नानं समर्पयामि
    वस्त्र : वस्त्रं समर्पयामि

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    899.00 1,699.00

    Ganesh Chaturthi also known as Vinayaka Chaturthi is a Hindu festival celebrating the birth of Ganesha. The festival is marked with the installation of Ganesha clay idols privately in homes, or publicly on elaborate pandals (temporary stages). Observations include chanting of Vedic hymns and Hindu texts such as , prayers and vrata (fasting). Offerings and prasadam from the daily prayers, that is distributed from the pandal to the community, include sweets such as modaka as it is believed to be a favorite of Lord Ganesh.

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  • Gari (Dry Coconut)


    Coconut has the ability to attract benevolent (Divine) as well as malevolent (distressing) frequencies. Hence, if a person is affected by negative energies, a coconut is used to perform the ritual of removing ‘drishta’ (evil-eye) to relieve his distress. The sound when breaking a coconut is akin to the destroyer mantra ‘Aum phat’. Because of the sound, the negative energies run away.

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    359.00 499.00

    Goverdhan Puja as it is also known, is a Hindu festival in which devotees prepare and offer a large variety of vegetarian food to Bhagwan (God) Shri Krishna as a mark of gratitude. For Vaishnavas, this day commemorates the incident in the Bhagavata Puran when Bhagwan Shri Krishna lifted the Govardhan Hill to provide the villagers of Vrindavan shelter from torrential rains. The incident is seen to represent how God will protect all devotees who take singular refuge in him. Devotees offer a mountain of food, metaphorically representing the Govardhan Hill, to God as a ritual remembrance and to renew their faith in taking refuge in God. The festival is observed by most of Hindu denominations all over India and abroad. For Vaishnavas this is one of the important festivals. For the Vallabh Sampradaya (Pushtimarg), the Gaudiya Sampradaya of Chaitanya, and the Swaminarayan Sampradaya etc among others. The Annakut festival occurs on the first lunar day of Shukla Paksha (bright fortnight) in the Hindu calendar month of Kartik, which is the fourth day of Deepawali (Diwali), the Hindu festival of lights, and also the first day of the Vikram Samvat calendar.

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    2,999.00 4,999.00 (Incl of Taxes)

    Griha Pravesh is a Hindu ceremony performed on the occasion of an individual’s first time entering their new home. The “Puja” or act of worship, is performed in various stages during the construction and entry of the home. Once the home is ready, the individual has to find an auspicious time to conduct the puja, in consultation with an astrologer or Hindu priest.

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    Hanuman Janam-Utsav is a Hindu religious festival that celebrates the birth of Lord Sri Hanuman, who is immensely venerated throughout India and Nepal. This festival is celebrated on different days in different parts of India. In most states of India, the festival is observed either in the month of Chaitra (usually on the day of Chaitra Pournimaa) or in the month of Vaishakha, while in a few states like Kerala and Tamil Nadu, it is celebrated in the Hindu month of Dhanu (called Margazhi in Tamil).

    On this auspicious day, devotees of Lord Hanuman celebrate him and seek his protection and blessings. They flock to temples to worship him and present religious offerings. In return, The devotees receive prasad by the temple priests in the form of sweets, flowers, coconuts, tilak, sacred ash (udi) and ganga jal (holy water). People also celebrate him on this day by reciting various devotional hyms and prayers like the Hanuman Chalisa and reading holy scriptures like the Ramayana and Mahabharata.

    Hanuman Janam-Utsav is an important festival of the Hindus. Lord Hanuman is an ardent devotee of Lord Sri Rama and is widely known for his unflinching devotion to Sri Rama. Hanuman is the symbol of strength and energy. He is said to be able to assume any form at will, wield the gada (including many celestial weapons), move mountains, dart through the air, seize the clouds and equally rival Garuda in swiftness of flight.

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    3,899.00 4,999.00

    A Hindu wedding is Vivaha (Sanskrit: विवाह[1]) and the wedding ceremony is called Vivaah Sanskar in North India and Kalyanam (generally) in South India.[2][3] Hindus attach a great deal of importance to marriage. The wedding ceremonies are very colourful, and celebrations may extend for several days.

    The rituals and process in a Hindu wedding vary widely. Nevertheless, the Hindu wedding ceremony at its core is essentially a Vedic yajna ritual and three key rituals are almost universal: Kanyadaan, Panigrahana, and Saptapadi—which are respectively, giving away of his daughter by the father, voluntarily holding hands near the fire to signify union, and taking seven ‘steps before fire’.

    At each step promises are made by each to the other. The primary witness of a Hindu marriage is the fire-deity or Agni, in the presence of family and friends. The ceremony is traditionally conducted entirely or at least partially in Sanskrit, considered by Hindus as the language of holy ceremonies. The local language of the bride and groom may also be used. The rituals are prescribed in the Gruhya sutra composed by various rishis such as Baudhayana and Ashvalayana.

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