Request for Pandit Ji

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    Chandra 11000 Vedic Mantra Jaap

    12,999.00 15,999.00

    शनिवार का चंद्र दर्शन करके पूजा करने से पहले दिन भर व्रत करें और शाम का स्‍नान करके शुद्ध हो कर चंद्रमा की पूजा करें। उसके बाद चंद्रमा को जल, रोली और अक्षत चढ़ा कर पूजा करें। इसके पश्‍चात सुपात्र को कपड़े, चावल और चीनी का दान करें। आप धन, फल और मिठाई आदि का भी दान कर सकते हैं। इसके बाद शुद्ध एवम् सात्‍विक भोजन ग्रहण करके अपना व्रत पूरा करें।

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    Durga Saptshati Pooja

    8,999.00 11,999.00

    श्री दुर्गा सप्तशती
    भुवनेश्वरी संहिता में कहा गया है- जिस प्रकार से ”वेद” अनादि है, उसी प्रकार ”सप्तशती” भी अनादि है। श्री व्यास जी द्वारा रचित महापुराणों में ”मार्कण्डेय पुराण” के माध्यम से मानव मात्र के कल्याण के लिए इसकी रचना की गई है। जिस प्रकार योग का सर्वोत्तम ग्रंथ गीता है उसी प्रकार ”दुर्गा सप्तशती” शक्ति उपासना का श्रेष्ठ ग्रंथ है |

    ‘दुर्गा सप्तशती’के सात सौ श्लोकों को तीन भागों प्रथम चरित्र (महाकाली), मध्यम चरित्र (महालक्ष्मी) तथा उत्तम चरित्र (महा सरस्वती) में विभाजित किया गया है।

    ‘दुर्गा सप्तशती’ के सात सौ श्लोकों का प्रयोग विवरण इस प्रकार से है।
    प्रयोगाणां तु नवति मारणे मोहनेऽत्र तु।
    उच्चाटे सतम्भने वापि प्रयोगाणां शतद्वयम्॥
    मध्यमेऽश चरित्रे स्यातृतीयेऽथ चरित्र के।
    विद्धेषवश्ययोश्चात्र प्रयोगरिकृते मताः॥
    एवं सप्तशत चात्र प्रयोगाः संप्त- कीर्तिताः॥
    तत्मात्सप्तशतीत्मेव प्रोकं व्यासेन धीमता॥
    अर्थात इस सप्तशती में मारण के नब्बे, मोहन के नब्बे, उच्चाटन के दो सौ, स्तंभन के दो सौ तथा वशीकरण और विद्वेषण के साठ प्रयोग दिए गये हैं। इस प्रकार यह कुल 700 श्लोक 700 प्रयोगों के समान माने गये हैं।

    दुर्गा सप्तशती पाठ विधि दुर्गा सप्तशती को सिद्ध कैसे करें-
    नवार्ण मंत्र जप और सप्तशती न्यास के बाद तेरह अध्यायों का क्रमशः पाठ, प्राचीन काल में कीलक, कवच और अर्गला का पाठ भी सप्तशती के मूल मंत्रों के साथ ही किया जाता रहा है। आज इसमें अथर्वशीर्ष, कुंजिका मंत्र, वेदोक्त रात्रि देवी सूक्त आदि का पाठ भी समाहित है जिससे साधक एक घंटे में देवी पाठ करते हैं।

    दुर्गा सप्तशती वाकार विधि :
    यह विधि अत्यंत सरल मानी गयी है। इस विधि में प्रथम दिन एक पाठ प्रथम अध्याय, दूसरे दिन दो पाठ द्वितीय, तृतीय अध्याय, तीसरे दिन एक पाठ चतुर्थ अध्याय, चौथे दिन चार पाठ पंचम, षष्ठ, सप्तम व अष्टम अध्याय, पांचवें दिन दो अध्यायों का पाठ नवम, दशम अध्याय, छठे दिन ग्यारहवां अध्याय, सातवें दिन दो पाठ द्वादश एवं त्रयोदश अध्याय करके एक आवृति सप्तशती की होती है।

    दुर्गा सप्तशती संपुट पाठ विधि :
    किसी विशेष प्रयोजन हेतु विशेष मंत्र से एक बार ऊपर तथा एक नीचे बांधना उदाहरण हेतु संपुट मंत्र मूलमंत्र-1, संपुट मंत्र फिर मूलमंत्र अंत में पुनः संपुट मंत्र आदि इस विधि में समय अधिक लगता है।

    दुर्गा सप्तशती सार्ध नवचण्डी विधि :
    इस विधि में नौ ब्राह्मण साधारण विधि द्वारा पाठ करते हैं। एक ब्राह्मण सप्तशती का आधा पाठ करता है। (जिसका अर्थ है- एक से चार अध्याय का संपूर्ण पाठ, पांचवे अध्याय में ”देवा उचुः- नमो देव्ये महादेव्यै” से आरंभ कर ऋषिरुवाच तक, एकादश अध्याय का नारायण स्तुति, बारहवां तथा तेरहवां अध्याय संपूर्ण) इस आधे पाठ को करने से ही संपूर्ण कार्य की पूर्णता मानी जाती है। एक अन्य ब्राह्मण द्वारा षडंग रुद्राष्टाध्यायी का पाठ किया जाता है। इस प्रकार कुल ग्यारह ब्राह्मणों द्वारा नवचण्डी विधि द्वारा सप्तशती का पाठ होता है। पाठ पश्चात् उत्तरांग करके अग्नि स्थापना कर पूर्णाहुति देते हुए हवन किया जाता है जिसमें नवग्रह समिधाओं से ग्रहयोग, सप्तशती के पूर्ण मंत्र, श्री सूक्त वाहन तथा शिवमंत्र ‘सद्सूक्त का प्रयोग होता है जिसके बाद ब्राह्मण भोजन,’ कुमारी का भोजन आदि किया जाता है। वाराही तंत्र में कहा गया है कि जो ”सार्धनवचण्डी” प्रयोग को संपन्न करता है वह प्राणमुक्त होने तक भयमुक्त रहता है, राज्य, श्री व संपत्ति प्राप्त करता है।

    दुर्गा सप्तशती शतचण्डी विधि :
    मां की प्रसन्नता हेतु किसी भी दुर्गा मंदिर के समीप सुंदर मण्डप व हवन कुंड स्थापित करके (पश्चिम या मध्य भाग में) दस उत्तम ब्राह्मणों (योग्य) को बुलाकर उन सभी के द्वारा पृथक-पृथक मार्कण्डेय पुराणोक्त श्री दुर्गा सप्तशती का दस बार पाठ करवाएं। इसके अलावा प्रत्येक ब्राह्मण से एक-एक हजार नवार्ण मंत्र भी करवाने चाहिए। शक्ति संप्रदाय वाले शतचण्डी (108) पाठ विधि हेतु अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी तथा पूर्णिमा का दिन शुभ मानते हैं। इस अनुष्ठान विधि में नौ कुमारियों का पूजन करना चाहिए जो दो से दस वर्ष तक की होनी चाहिए तथा इन कन्याओं को क्रमशः कुमारी, त्रिमूर्ति, कल्याणी, रोहिणी, कालिका, शाम्भवी, दुर्गा, चंडिका तथा मुद्रा नाम मंत्रों से पूजना चाहिए। इस कन्या पूजन में संपूर्ण मनोरथ सिद्धि हेतु ब्राह्मण कन्या, यश हेतु क्षत्रिय कन्या, धन के लिए वेश्य तथा पुत्र प्राप्ति हेतु शूद्र कन्या का पूजन करें।

    इन सभी कन्याओं का आवाहन प्रत्येक देवी का नाम लेकर यथा ”मैं मंत्राक्षरमयी लक्ष्मीरुपिणी, मातृरुपधारिणी तथा साक्षात् नव दुर्गा स्वरूपिणी कन्याओं का आवाहन करता हूं तथा प्रत्येक देवी को नमस्कार करता हूं।” इस प्रकार से प्रार्थना करनी चाहिए। वेदी पर सर्वतोभद्र मण्डल बनाकर कलश स्थापना कर पूजन करें। शतचण्डी विधि अनुष्ठान में यंत्रस्थ कलश, श्री गणेश, नवग्रह, मातृका, वास्तु, सप्तऋषी, सप्तचिरंजीव, 64 योगिनी 50 क्षेत्रपाल तथा अन्याय देवताओं का वैदिक पूजन होता है। जिसके पश्चात् चार दिनों तक पूजा सहित पाठ करना चाहिए। पांचवें दिन हवन होता है।

    इन सब विधियों (अनुष्ठानों) के अतिरिक्त प्रतिलोम विधि, कृष्ण विधि, चतुर्दशीविधि, अष्टमी विधि, सहस्त्रचण्डी विधि (1008) पाठ, ददाति विधि, प्रतिगृहणाति विधि आदि अत्यंत गोपनीय विधियां भी हैं जिनसे साधक इच्छित वस्तुओं की प्राप्ति कर सकता है।

    दुर्गा सप्तशती/ श्री दुर्गासप्तशती महायज्ञ / अनुष्ठान विधि
    भगवती मां दुर्गाजी की प्रसन्नता के लिए जो अनुष्ठान किये जाते हैं उनमें दुर्गा सप्तशती का अनुष्ठान विशेष कल्याणकारी माना गया है। इस अनुष्ठान को ही शक्ति साधना भी कहा जाता है। शक्ति मानव के दैनन्दिन व्यावहारिक जीवन की आपदाओं का निवारण कर ज्ञान, बल, क्रिया शक्ति आदि प्रदान कर उसकी धर्म-अर्थ काममूलक इच्छाओं को पूर्ण करती है एवं अंत में आलौकिक परमानंद का अधिकारी बनाकर उसे मोक्ष प्रदान करती है। दुर्गा सप्तशती एक तांत्रिक पुस्तक होने का गौरव भी प्राप्त करती है। भगवती शक्ति एक होकर भी लोक कल्याण के लिए अनेक रूपों को धारण करती है। श्वेतांबर उपनिषद के अनुसार यही आद्या शक्ति त्रिशक्ति अर्थात महाकाली, महालक्ष्मी एवं महासरस्वती के रूप में प्रकट होती है। इस प्रकार पराशक्ति त्रिशक्ति, नवदुर्गा, दश महाविद्या और ऐसे ही अनंत नामों से परम पूज्य है। श्री दुर्गा सप्तशती नारायणावतार श्री व्यासजी द्वारा रचित महा पुराणों में मार्कण्डेयपुराण से ली गयी है। इसम सात सौ पद्यों का समावेश होने के कारण इसे सप्तशती का नाम दिया गया है। तंत्र शास्त्रों में इसका सर्वाधिक महत्व प्रतिपादित है और तांत्रिक प्रक्रियाओं का इसके पाठ में बहुधा उपयोग होता आया है। पूरे दुर्गा सप्तशती में 360 शक्तियों का वर्णन है। इस पुस्तक में तेरह अध्याय हैं। शास्त्रों के अनुसार शक्ति पूजन के साथ भैरव पूजन भी अनिवार्य माना गया है। अतः अष्टोत्तरशतनाम रूप बटुक भैरव की नामावली का पाठ भी दुर्गासप्तशती के अंगों में जोड़ दिया जाता है। इसका प्रयोग तीन प्रकार से होता है।

    [ 1.] नवार्ण मंत्र के जप से पहले भैरवो भूतनाथश्च से प्रभविष्णुरितीवरितक या नमोऽत्त नामबली या भैरवजी के मूल मंत्र का 108 बार जप।
    [ 2.] प्रत्येक चरित्र के आद्यान्त में 1ुन्डेफिनेड1 पाठ।
    [ 3.] प्रत्येक उवाचमंत्र के आस-पास संपुट देकर पाठ। नैवेद्य का प्रयोग अपनी कामनापूर्ति हेतु दैनिक पूजा में नित्य किया जा सकता है। यदि मां दुर्गाजी की प्रतिमा कांसे की हो तो विशेष फलदायिनी होती है।

    दुर्गा सप्तशती का अनुष्ठान कैसे करें।
    1. कलश स्थापना
    2. गौरी गणेश पूजन
    3. नवग्रह पूजन
    4. षोडश मातृकाओं का पूजन
    5. कुल देवी का पूजन
    6. मां दुर्गा जी का पूजन निम्न प्रकार से करें।
    आवाहन : आवाहनार्थे पुष्पांजली सर्मपयामि।
    आसन : आसनार्थे पुष्पाणि समर्पयामि।
    पाद : पाद्यर्यो : पाद्य समर्पयामि।
    अर्घ्य : हस्तयो : अर्घ्य स्नानः ।
    आचमन : आचमन समर्पयामि।
    स्नान : स्नानादि जलं समर्पयामि।
    स्नानांग : आचमन : स्नानन्ते पुनराचमनीयं जलं समर्पयामि।
    दुधि स्नान : दुग्ध स्नान समर्पयामि।
    दहि स्नान : दधि स्नानं समर्पयामि।
    घृत स्नान : घृतस्नानं समर्पयामि।
    शहद स्नान : मधु स्नानं सर्मपयामि।
    शर्करा स्नान : शर्करा स्नानं समर्पयामि।
    पंचामृत स्नान : पंचामृत स्नानं समर्पयामि।
    गन्धोदक स्नान : गन्धोदक स्नानं समर्पयामि
    शुद्धोदक स्नान : शुद्धोदक स्नानं समर्पयामि
    वस्त्र : वस्त्रं समर्पयामि

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    Kaal Sarp Dosh Pooja

    13,999.00 17,999.00

    Kaal Sarp dosh afflicts a person when all the seven planets occur in between Rahu and Ketu. While the effects of Kaal sarp dosh can vary between persons depending on the planetary positions, in general, people affected by this condition shall face severe troubles, sufferings and crisis situations in life.

    Kaal sarp dosh puja is a highly beneficial one that can help alleviate the dire consequences of Kaal sarp dosh. The most auspicious time to do this puja is the Amavasya day that falls on a Wednesday. Kaal Sarp puja can prove to be immensely powerful to alleviate the intensity of kaal sarp dosh and bring a great degree of solace and relief to the individual.

    Get three small sized snakes made one each in copper, lead and silver. Wear new clothes for the puja. Decorate the puja altar with flowers, turmeric paste, sandal paste and vermilion. Place a pedestal and place a puja thali on the pedestal. Place all the three metal snakes on the thali.

    Make a small cone shaped Ganeshji image in trurmeric paste and place it on a betel leaf or mango leaf in front of the three snake images. Decorate the Ganeshji image with flowers. Start the puja with prayers and offerings to Lord Ganesh.

    Keep chanting Om Namashivaya and give holy bath to the snake images in water, milk, honey, and other fragrant holy bath substances. After this, decorate the images with turmeric paste, sandal paste and vermilion and offer flowers and garlands.

    Chant Vishnu Sahasranam and Navanag stotram. Make diyas (lamps) in sweet flour and light them in front of the snake images with ghee and cotton wick. Offer fruits, coconut, some select range of sprouts and betel leaves to the images along with the Prasad you have specially prepared for the puja.

    Recollect all your problems and say it inside yourself asking for remedies and protection. At the end of the puja, distribute the Prasad to people and donate the clothes worn during the puja to poor people.

    Offer Namaskar and conclude the puja by taking the snakes from the puja thali. Drop the copper and lead snakes in the running stream of holy river near your place and gift the silver snake in the nearby Shiva temple.

    During the kaal sarp puja and following that, chant the mantra, “Rahave Ketave Namaha”. The ideal number to chant this mantra is 18,000 times in regular schedules within the next few days.

    When performed sincerely and diligently with faith, kaal sarp puja is a highly efficacious one that shall help relieve the candidate from the ill effects of the kaal sarp dosh. After the puja, you will find your life becoming a better experience and got relieved from the troubles that haunted for a long time.

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    Ketu 11000 Vedic Mantra Jaap

    9,999.00 12,999.00

    On the off chance that Mythical serpent’s Tail is malefic in one horoscope diagram then Ketu Puja is prescribed to expel the malefic impacts.

    Discussing the accompanying mantra after nightfall, confronting north – west heading, will truly lessen the awful impact of Ketu.

    Mythical serpent’s Tail allows great wellbeing, riches and all round thriving. Ketu has no sign ruler ships, in spite of the fact that it is recognized to support Mercury and Jupiter’s signs as indicated by a few specialists, while others guarantee that Ketu favors the indication of Scorpio.

    Ketu is a marker of knowledge, intelligence, most profound sense of being, entering understanding, and intangibility and physic capacities. Business, infection, toxic chomps are diverse parts of this planet. Ketu speaks to the otherworldly procedure of advancement.

    Ketu is considered as a common malefic and profoundly benefice, as it causes distress and misfortune, which at last turns the person to god.

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    MAA KALI BRONZE STATUE

    6,999.00 9,999.00

    Weight: 2556 gram

    Length: 30 Cm

    Height: 18 Cm

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    Mahamrutunjay Jaap 12500 Mantro Ka Jaap

    45,000.00 49,499.00

    || महा मृत्युंएजय मंत्र ||
    ॐ त्र्यम्बक यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धन्म। उर्वारुकमिव बन्धनामृत्येर्मुक्षीय मामृतात् !!

    || महा मृत्युंजय मंत्र का अक्षरशः अर्थ ||
    त्रयंबकम = त्रि-नेत्रों वालायजामहे = हम पूजते हैं, सम्मान करते हैं, हमारे श्रद्देयसुगंधिम= मीठी महक वाला, सुगंधितपुष्टि = एक सुपोषित स्थिति,फलने-फूलने वाली, समृद्ध जीवन की परिपूर्णतावर्धनम = वह जो पोषण करता है, शक्ति देता है,स्वास्थ्य, धन, सुख में वृद्धिकारक; जो हर्षित करता है, आनन्दित करता है, और स्वास्थ्य प्रदान करता है, एक अच्छा मालीउर्वारुकम= ककड़ीइव= जैसे, इस तरहबंधना= तनामृत्युर = मृत्यु सेमुक्षिया = हमें स्वतंत्र करें, मुक्ति देंमा= नअमृतात= अमरता, मोक्ष

    ||संपुटयुक्त महा मृत्युं्जय मंत्र ||
    ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्बजकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्ध्नान् मृत्योतर्मुक्षीय मामृतात् ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ !!

    ||लघु मृत्युंभजय मंत्र ||
    ॐ जूं स माम् पालय पालय स: जूं ॐ। किसी दुसरे के लिए जप करना हो तो-ॐ जूं स (उस व्यक्ति का नाम जिसके लिए अनुष्ठान हो रहा हो) पालय पालय स: जूं ॐ

    ||महा मृत्युंपजय मंत्र का अर्थ ||
    समस्तठ संसार के पालनहार, तीन नेत्र वाले शिव की हम अराधना करते हैं। विश्वि में सुरभि फैलाने वाले भगवान शिव मृत्यु न कि मोक्ष से हमें मुक्ति दिलाएं।|| इस मंत्र का विस्तृत रूप से अर्थ ||हम भगवान शंकर की पूजा करते हैं, जिनके तीन नेत्र हैं, जो प्रत्येक श्वास में जीवन शक्ति का संचार करते हैं, जो सम्पूर्ण जगत का पालन-पोषण अपनी शक्ति से कर रहे हैं,उनसे हमारी प्रार्थना है कि वे हमें मृत्यु के बंधनों से मुक्त कर दें, जिससे मोक्ष की प्राप्ति हो जाए.जिस प्रकार एक ककड़ी अपनी बेल में पक जाने के उपरांत उस बेल-रूपी संसार के बंधन से मुक्त हो जाती है, उसी प्रकार हम भी इस संसार-रूपी बेल में पक जाने के उपरांत जन्म-मृत्यु के बन्धनों से सदा के लिए मुक्त हो जाएं, तथा आपके चरणों की अमृतधारा का पान करते हुए शरीर को त्यागकर आप ही में लीन हो जाएं

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    Rahu 11000 Vedic Mantra Jaap

    9,999.00 12,999.00

    Rahu is one of the nine planets ruling the astrological world. Also identified as the north node, Rahu graha’s effect on one’s horoscope has mixed kind of influences both positive and negative depending on the position of Rahu, its alignment with the other grahas and the nature of the birth chart of the individual.
    When the position of Rahu is strong, it is believed to bestow the individual with powers and success in the material world. In addition, the individual might also gain a lot of psychic powers. There could also be dangers from drugs and black magic. The positive effects of Rahu include aligning people with the popular trends in the society and helping them get famous and consequently gain position, power and social status.

    Rahu Bheeja Mantras Benefits
    The mantras given below are some of the Bheeja Mantras of Rahu and are highly powerful in directly sending your prayers to Rahu graha.

    You can use these mantras to connect with Rahu and derive all the benefits for your progress. Chanting these mantras can energize you with amazing powers and elevate your status in the society working from multiple angles.
    1. Om Dhum Ram Rahave Namah
    2. Om Bhraam Bhreem Bhraum Sah Rahave Namah
    3. Om Raam Rahve Namah
    4. Aum Rang Rahave Namah

    You can choose either one or more Bheeja mantras for your chanting process. In one sitting, you can chant 108 times making one round of the rosary.

    Rahu Gayatri Mantras
    Om Sookdantaya Vidmahe, Ugraroopaya Dhimahi
    Tanno Rahu Prachodayat
    Om Naakadhwajaaya Vidmahae Padma Hastaaya Dheemahi
    Tanno Raahu Prachodayaat

    Rahu Shanti Mantra
    Om Rahuve Devaye Shaantim, Rahuve Kripaaye Karoti, Rahuaaye chamaaye abhilaashat, Om Rahuve Namoh Namah.

    Rahu Mantra from Puranas
    Ardha-kayam mahim-viryam chandraditya-vimardanam
    simhika- -garbha-sambhutam tam rahum pranamamy aham

    The ideal number for chanting a Rahu mantra is 18,000 times within a span of 40 days. The right time is during night. While engaged in chanting, you might also perform puja with blue flowers and sandal paste. The chanting can be started on a Saturday. You may also place Kali and Durga Yantra in the place where you chant this mantra to speed up the results.

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    Rudra Abhishek Pooja

    7,999.00 10,999.00

    About Rudra Abhishek Pooja

    Rudra is a famous name of Lord Shiva. Rudrabhishek is the famous puja and worship performed to Shivling by giving a holy bath. This is one of the most powerful forms of worships in Hinduism and is believed to bless the devotees with prosperity and peace and remove the sins of many births.

    Rudrabhishek is performed on Shivratris month after month. However, any day of Shravan (July – August) is ideally suited for Rudrabhishek. The essence of this puja is the holy chant of Sri Rudam from the Yajur Veda and giving a holy bath to Shivling with many materials including Panchmrit or fruit salad soaked in honey.

    Rudra Abhishek Preparation & Procedure

    Before the beginning of Rudrabhishek elaborate preparations need to go. Asanas or seats are prepared for Lord Shiva, Mother Parvati, other gods and goddesses and Navagrahas. The blessings of the Lord are sought before commencing the puja along with worship of Ganesh for the successful completion of the puja. The devotee also chants the sankalp or the determination mentioning why the puja is performed.

    The pujas performed to different gods and universal energies include Mother Earth, Ganga Mata, Ganesh, Lord Surya, Goddess Lakshmi, Lord Agni, Lord Brahma and the nine planets in this order. Once the puja and offerings are made to all these deities, the Shivling to be worshipped is placed on the altar with arrangements to collect the water flowing from the image during abhishek

    Besides lamps, oil or ghee, flowers, sandal paste, vermilion, incense, camphor, special dishes, kheer, fruits, betel leaves and nuts, coconuts and others, the materials gathered for the abhishek include holy ash, fresh milk, curds, honey, rose water, panchamrit (fruit salad with honey), sugarcane juice, tender coconut water, sandal water, Gangal Jal and other fragrant substances you might like to offer.

    The elaborate version of the Rudrabhishek is done after doing a homa or sacrificial offering in fire. This is done by accomplished priests. Following that the Shivling is set up facing the north direction. The devotee sits facing the east direction near the Shivling. The abhishek is done with Ganga Jal to start with and all the materials meant for abhishek are poured on the shivling one after the other washing the Shivling in between every kind of abhishek with Ganga Jal.

    At the end, special dishes are offered to the lord and arati is performed. The Ganga Jal collected from the abhishek is sprinkled on the devotees and also given for drinking, which is believed to remove all the sins and diseases. Rudram or ‘Om Namashivaya’ is chanted all through during
    the Rudrabhishek.

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    Santan Gopal Pooja

    38,000.00 42,000.00

    श्री संतान गोपाल पूजा का आरंभ गुरुवार या रविवार के दिन से ही करना चाहिए। इसके साथ ही इसके आठवें दिन इस पूजा का समापन कर दिया जाता है। इस प्रकार यह पूजा करीब आठ दिन तक चलती है। इस पूजा अनुष्ठान में 125,000 बार श्री संतान गोपाल मंत्र का जाप किया जाता है।

    पूजा के पहले दिन करीब 7 या 5 पंडित शिवजी, भगवान कृष्ण और मां शक्ति के सामने बैठकर जातक के लिए 125,000 बार श्री संतान गोपाल मंत्र जाप करने का संकल्प लेते हैं। इसके बाद सभी देवी- देवताओं की पूजा कर अनुष्ठान का आरंभ करते हैं। पूजा के आरंभ में सभी पंडितों का नाम और गोत्र बोला जाता है और पुत्र रत्न की प्राप्ति की कामना करते हैं।

    इसके बाद सभी पंडित जातक के लिए श्री संतान गोपाल मंत्र का जाप करना शुरू कर देते हैं। प्रत्येक पंडित इस मंत्र को आठ से दस घंटे तक प्रतिदिन जपता है ताकि निश्चित समय सीमा में 125,000 बार मंत्रों का जाप पूर्ण हो सके। मंत्रों के जाप के बाद भगवान श्रीकृष्ण जी की विधिवत रूप से पूजा करनी चाहिए। इसके बाद पंडित श्री संतान गोपाल मंत्र के पूर्ण होने का संकल्प करता है। इसके साथ ही इस पूजा का फल जातक को समर्पित करता है।

    पूजा के अंत में देशी -घी, तिल, सामग्री और आम की लकड़ी द्वारा हवन कुंड जलाया जाता है तथा श्री संतान गोपाल मंत्र का जाप करते हुए घी, तिल, नारियल और सामग्री अग्नि को समर्पित किया जाता है। इसके बाद हवन कुंड के चारों तरफ जातक 5 या 7 चक्कर लगाता है।

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    Shani 11000 Vedic Mantra Jaap

    9,999.00 14,999.00

    Shani Mantra is one of the most efficacious ones to chant in a way averting the ill effects of the Saade Sati (7½ year) period when an individual comes under the influence of Shani or Saturn. The name Shanidev comes from the root Sanaischara meaning slow mover (the word ‘chara’ in Sanskrit means ‘movement). Astrologically, the planet of Shani or Saturn is the slowest moving one that resides for about 2½ years in a given zodiac sign. Therefore, the Saade Sati period in an individual’s life corresponds to the time taken by Saturn to move over the three zodiac signs including the one before yours and the one after yours (2½ X 3=7½). No individual can escape the adverse effects pronounced by the rule of Shani. However, the extent of adversities depends on every individual’s ‘Karma’ or the result of past deeds. When you feel dejected, depressed and demotivated due to the troubles you face during the Saade Sati period, you can resort to chanting the Shani Mantra which will do you so much good including boosting up your morale and confidence.

    “Om Nilaanjana Samaabhasam, Ravi Putram Yamagrajam.
    Cahaya Martanda Samhubhutam, Tama Namami Shanescharam”

    Mode of chanting Shani Mantra
    Having taken bath and seated in a silent and serene place, you may contemplate on the image of Shanidev and recite this mantra. Focus on the wonderful and majestic form of Sahanidev and chant this mantra in all devotion and faith. The ideal time to say this prayer is evening. You may also have an image or photograph of Lord Hanuman in front of you and offer flowers and worship to Hanuman which will equally please Shanidev. To have the best results, Shani Mantra is to be chanted 23,000 times. You may do this chanting in a phased manner. In a hectic schedule, you can chant the Shani mantra eight times during a particular cycle. Chanting for 108 times can be done whenever it is possible. Alternatively, you may keep chanting the mantra as you travel or when you are with your work.

    Lord Shani’s Birth Story
    As Lord Shani was in Chhaya’s womb she did severe penance sitting under the dazzling Sun to impress Lord Shiva. The Divine intertwined and the celestial energies nurtured the baby in her womb and Lord Shani turned out to be a great devotee of Lord Shiva. As Chhaya sat under the Sun, Lord Shani kept growing black in her womb – as he was born Lord Sun despised him being black and even rejected to accept him as his own. It is believed, it angered Lord Shani and his eyes cast upon his father, Lord Sun was charred as black too.
    Many people mistake Lord Shani as cruel and easy to enrage, however, he is a very benevolent God – a strict one, though. He is generous and giving but demands discrepancy-free lifestyle and one should be just and fair in behaviour. He is God of Justice for a reason.

    Important Information –
    1. All Pooja request need to be submitted minimum 7 days prior of actual planned date
    2. Once after successful order our team will share the Pundit’s name & other details within 3/4 days via registered email & SMS
    3. All Pooja essentials to be arranged by the organiser
    4. Food & accommodations for the pundits to be arranged by the organiser in case of the Pooja is continue more than 1 day
    5. All payments of pundits will be taken care by Ritualsmart

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    Shukra 11000 Vedic Mantra Jaap

    12,999.00 15,999.00

    The Shukra Puja is commanded via planet Shukra. It is managed via planet Shukra. This pooja is all the more capable. On the off chance that you have been experiencing many sort of issues, you have to perform Shukra Puja. Here, we will share more about Shukra Puja Vidhi.

    Mantra For Shukra Puja –

    Here, we will say the mantra which is required to serenade 21 times or 108 times while wearing-

    ” || Om measure dreem droum sah shukraya namah || ”

    Pooja Samagrim –

    • Kalash
    • Coconut
    • Chunri
    • Ganga Jaal
    • Roli
    • Photograph of Goddess Matangi
    • Rice
    • Organic product
    • Doop
    • Kapoor
    • Sweet
    • Hawan Samagrim
    • Ghee
    • Diya
    • Batti
    • Haldi
    • Drain
    • Dahi

    Shukra Pooja Vidhi –
    1. You need to do quick of Planet Shukra on Friday.
    2. You need to begin this quick on first Friday of shukal paksh.
    3. You need to do this quick for twenty one or forty fife Friday.
    4. You need to maintain a strategic distance from iodine.
    5. You need to deal with cleanliness. You need to build up Shukra Yantra and love each day.
    6. You need to dainty Halwa or Panjari of lentil and give it and after that you need to eat them in night.
    7. on the most recent day of quick on Wednesday you have end it by doing Havan with Shukra mantra and serve savants with
    sweet nourishment and give stuffs.

    Important Information –
    1. All Pooja request need to be submitted minimum 7 days prior of actual planned date
    2. Once after successful order our team will share the Pundit’s name & other details within 3/4 days via registered email & SMS
    3. All Pooja essentials to be arranged by the organiser
    4. Food & accommodations for the pundits to be arranged by the organiser in case of the Pooja is continue more than 1 day
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  • Terracotta

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